सनातन महातीर्थ · योगेश्वर श्री कृष्ण का पावन अवतरण स्थल
वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम्। देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्॥
भावार्थ: वसुदेव के पुत्र, कंस और चाणूर का मर्दन करने वाले, माता देवकी को परम आनंद देने वाले जगद्गुरु भगवान श्री कृष्ण को मैं प्रणाम करता हूँ।
राजा कंस के अत्याचारों के अंत और धर्म की पुनः स्थापना हेतु साक्षात भगवान नारायण ने देवकी के आठवें गर्भ से इसी कारागार में जन्म लिया और वसुदेव जी उन्हें यमुना पार गोकुल ले गए।
महाभारत एवं श्रीमद्भागवत का केंद्र। विदेशी आक्रांताओं द्वारा तोड़े जाने के बाद महामना मदन मोहन मालवीय जी के संकल्प से इस पावन तीर्थ का भव्य जीर्णोद्धार हुआ।
प्राचीन कारागार का मूल पाषाण गर्भगृह, जहाँ शिला पर शंख-चक्र अंकित हैं। साथ ही भव्य भागवत भवन, केशवदेव मंदिर और विशाल पोतरा कुंड।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| मंगला आरती | प्रातः 05:30 - 06:00 | ब्रह्ममुहूर्त में प्रभु जगाने की आरती |
| माखन भोग आरती | प्रातः 08:00 - 08:30 | बाल गोपाल को माखन-मिश्री भोग |
| संध्या आरती | सायं 06:30 - 07:15 | भव्य दीप आरती |
| शयन आरती | रात्रि 09:00 - 09:30 | रात्रि विश्राम |
कुर्ता-पायजामा, धोती या शालीन पैंट-शर्ट।
साड़ी या सलवार-सूट (शालीन भारतीय परिधान)।
💡 सुरक्षा जांच अत्यंत सख्त रहती है, सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लॉकर में जमा करने होते हैं।
लाखों भक्तों की उपस्थिति, मध्यरात्रि 12 बजे महाभिषेक
विश्व प्रसिद्ध अबीर-गुलाल उत्सव
लाडली जी का जन्मोत्सव
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