स्वामी हरिदास जी की साधना से प्रकट · त्रिभंगी मुद्रा में ठाकुर जी · मथुरा-वृंदावन
कस्तुरीतिलकं ललाटपटले वक्षःस्थले कौस्तुभं, नासाग्रे वरमौक्तिकं करतले वेणुं करे कङ्कणम्। सर्वाङ्गे हरिचन्दनं सुललितं कण्ठे च मुक्तावलिं, गोपस्त्रीपरिवेष्टितो विजयते गोपालचूडामणिः॥
भावार्थ: जिनके ललाट पर कस्तूरी का तिलक है, वक्षःस्थल पर कौस्तुभ मणि है, नासिका में सुंदर मोती है, हाथ में बाँसुरी है, सर्वांग में सुगंधित चंदन का लेप है, वे गोपियों से घिरे गोपाल मुकुटमणि सदा विजयी हों।
मान्यता है कि बांके बिहारी जी अपने भक्तों के प्रेम के इतने वशीभूत हैं कि एक बार एक राजस्थान की राजकुमारी के एकटक प्रेमपूर्ण दर्शन करने पर बिहारी जी उसके पीछे-पीछे उसके महल तक चले गए थे। तब से मंदिर में हर दो मिनट पर पर्दा डाला और हटाया जाता है (झांकी दर्शन) ताकि बिहारी जी किसी भक्त के साथ मंदिर छोड़कर न चले जाएं।
संगीत सम्राट तानसेन के गुरु स्वामी हरिदास जी जब निधिवन में तन्मयता से पद गाते थे, तब राधा-कृष्ण युगल जोड़ी साक्षात प्रकट होकर उन्हें दर्शन देती थी। संतों की प्रार्थना पर वे दोनों एक विग्रह में समाहित होकर "बांके बिहारी" (बांके अर्थात् तीन जगह से मुड़े हुए, बिहारी अर्थात् आनंदमयी लीला करने वाले) के रूप में प्रतिष्ठित हुए।
मंदिर की बनावट अत्यंत सात्विक और भक्तिमय है। यहाँ वर्ष में केवल एक बार शरद पूर्णिमा को बिहारी जी की बंसी धारण कराई जाती है और वर्ष में केवल एक बार अक्षय तृतीया को उनके पावन चरण कमलों के दर्शन होते हैं। मंगला आरती वर्ष में केवल एक बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की मध्यरात्रि को होती है।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| श्रृंगार आरती | प्रातः 08:00 बजे (ग्रीष्म) / 09:00 बजे (शीत) | अलौकिक श्रृंगार एवं दर्शन |
| राजभोग आरती | दोपहर 11:55 बजे (ग्रीष्म) / 12:55 बजे (शीत) | दोपहर का राजभोग अर्पण |
| शयन आरती | रात्रि 09:25 बजे (ग्रीष्म) / 08:25 बजे (शीत) | दिन की अंतिम आरती व शयन |
धोती-कुर्ता या सात्विक पैंट-शर्ट। मर्यादापूर्ण परिधान।
साड़ी या सलवार-कमीज। मर्यादापूर्ण वस्त्र।
💡 वृंदावन की संकरी गलियों में बंदरों से चश्मा, मोबाइल और बैग की विशेष सुरक्षा रखें।
वर्ष में एकमात्र रात्रि मंगला आरती (मध्यरात्रि 02:00 बजे)
बिहारी जी स्वयं भक्तों पर अबीर, गुलाल और टेसू का रंग बरसाते हैं
वर्ष में केवल एक बार बिहारी जी के श्रीचरणों के दुर्लभ दर्शन और चंदन लेप
सोने-चांदी के विशाल हिंडोले पर ठाकुर जी झूलते हैं
दिल्ली एयरपोर्ट से यमुना एक्सप्रेसवे द्वारा मात्र 2.5 घंटे में वृंदावन पहुँचा जा सकता है।
मथुरा जंक्शन देश के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों में से एक है। स्टेशन से ई-रिक्शा या ऑटो से 30 मिनट में वृंदावन पहुँचें।
यमुना एक्सप्रेसवे (दिल्ली-आगरा) से वृंदावन एग्जिट मात्र 8 किमी दूर है।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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