मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम की जन्मस्थली · पावन अयोध्या धाम
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणम्। नवकञ्जलोचन, कञ्जमुख, करकञ्ज, पद कञ्जारुणम्॥ कन्दर्प अगणित अमित छबि, नवनीलनीरद सुन्दरम्। पट पीत मानहु तड़ित रुचि शुचि नौमि जनक सुतावरम्॥
भावार्थ: हे मन! कृपालु श्री रामचंद्र जी का भजन कर, जो संसार के दारुण भय को हरने वाले हैं। जिनके नेत्र, मुख, हाथ और चरण नवीन लाल कमल के समान सुंदर हैं, उन जानकीनाथ को मैं नमन करता हूँ।
चैत्र शुक्ल नवमी को अभिजित मुहूर्त में कौशल्या नंदन प्रभु श्री राम का अवतार हुआ। भगवान शिव स्वयं बाल राम के दर्शन हेतु काकभुशुंडि के साथ ज्योतिषी का रूप धरकर आए थे। अयोध्या के कण-कण में राम नाम की पावन शक्ति स्पंदित होती है।
वाल्मीकि रामायण के अनुसार अयोध्या त्रेतायुग में भगवान श्री राम की जन्मभूमि और राजधानी रही। 1528 में विदेशी आक्रांता बाबर द्वारा मंदिर तोड़े जाने के बाद 5 शताब्दियों तक संतों, राजाओं और भक्तों ने संघर्ष किया। 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय के पश्चात मंदिर निर्माण प्रारंभ हुआ।
मंदिर 380 फीट लंबा, 250 फीट चौड़ा और 161 फीट ऊँचा है जिसमें 392 नक्काशीदार खंभे और 44 सागवान के स्वर्ण-जड़ित दरवाजे हैं। मंदिर निर्माण में लोहे या स्टील का 1% भी प्रयोग नहीं किया गया है, केवल तांबे की पत्तियों और पत्थरों की इंटरलॉकिंग की गई है जिससे यह 1000 वर्षों तक बिना किसी क्षति के अक्षुण्ण रहेगा। रामनवमी पर सूर्य की किरणें सीधे रामलला के मस्तक पर "सूर्य तिलक" करती हैं।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| मंगला आरती | प्रातः 04:30 बजे | बाल स्वरूप रामलला को जगाने की आरती |
| श्रृंगार आरती | प्रातः 06:30 बजे | पीतांबर, मुकुट व स्वर्ण आभूषणों से सजावट |
| भोग आरती | दोपहर 12:00 बजे | राजभोग अर्पण एवं अल्प विश्राम |
| संध्या आरती | सायं 07:30 बजे | दीपों से भव्य महाआरती |
| शयन आरती | रात्रि 10:00 बजे | लोरी गायन के साथ प्रभु का शयन |
धोती-कुर्ता या शालीन पैंट-शर्ट। अंगवस्त्र (दुपट्टा)।
साड़ी या सलवार-कमीज। मर्यादापूर्ण वस्त्र।
💡 तीर्थयात्री सुविधा केंद्र (PFC) पर सामान जमा करने और दर्शन पास प्राप्त करने की सुव्यवस्थित व्यवस्था है।
दोपहर 12:00 बजे रामलला का सूर्य तिलक एवं 56 भोग
सरयू के तट पर 25 लाख दीपों का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड
सीता-राम विवाहोत्सव एवं भव्य बारात
अयोध्या एयरपोर्ट से मंदिर मात्र 20 मिनट की दूरी पर है। दिल्ली, मुम्बई, अहमदाबाद, बेंगलुरु से सीधी फ्लाइट्स हैं।
नवनिर्मित अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन से मंदिर मात्र 1.5 किमी दूर है जहाँ से ई-रिक्शा द्वारा 5 मिनट में पहुँच सकते हैं।
लखनऊ-अयोध्या हाईवे (NH-27) और गोरखपुर-अयोध्या मार्ग से शानदार कनेक्टिविटी है। लखनऊ से मात्र 2.5 घंटे का सफर है।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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