
विश्व का एकमात्र दाढ़ी एवं मूंछ वाले हनुमान जी का जाग्रत धाम · चूरू, राजस्थान
मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥ जय श्री सालासर बालाजी महाराज!॥
भावार्थ: मन के समान वेग वाले, वायु के समान गति वाले, इंद्रियों को जीतने वाले, बुद्धिमानों में श्रेष्ठ, पवनपुत्र, वानरसेना के प्रमुख श्री रामदूत हनुमान जी की मैं शरण लेता हूँ।
भक्त मोहनदास जी की अनन्य निष्ठा से प्रसन्न होकर भगवान हनुमान जी ने उन्हें एक तपस्वी वृद्ध के रूप में दाढ़ी-मूंछ युक्त मुखमंडल में साक्षात दर्शन दिए थे। भक्त की प्रार्थना पर प्रभु ने उसी स्वरूप में पाषाण शिला पर प्रकट होकर भक्तों की रक्षा का वचन दिया।
असोता गांव में एक जाट किसान को खेत जोतते समय हल से टकराकर यह चमत्कारी स्वयंभू मूर्ति मिली थी। उसी रात भगवान हनुमान ने स्वप्न में भक्त मोहनदास जी को सालासर में मंदिर स्थापित करने की आज्ञा दी। मोहनदास जी द्वारा जलाई गई पावन "अखंड धूणी" आज 270 वर्षों से अनवरत प्रज्वलित है जिसकी भस्म समस्त रोगों को हरती है।
मंदिर का गर्भगृह विशुद्ध सफेद संगमरमर से बना है जिसके ऊपर सोने की पच्चीकारी की गई है। मुख्य प्रतिमा सिंदूर से अलंकृत है। मंदिर परिसर में कांच की बारीक कारीगरी (शीशमहल) दर्शनीय है।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| मंगला आरती | प्रातः 05:00 बजे | प्रातःकालीन जागरण आरती |
| धूप आरती | प्रातः 10:30 बजे | गुग्गल व धूप अर्पण |
| संध्या महाआरती | सायं 07:30 बजे | दीपों से आरती |
| शयन आरती | रात्रि 10:00 बजे | दिन की अंतिम आरती |
धोती-कुर्ता या शालीन पैंट-शर्ट।
साड़ी या सलवार-सूट।
💡 मनोकामना नारियल मंदिर के पवित्र वटवृक्ष पर बांधा जाता है।
लाखों पदयात्रियों का आगमन और अखंड रामधुन संकीर्तन
खीर भोग और भव्य भजन संध्या
जयपुर एयरपोर्ट से 3 घंटे में कैब या बस से सालासर पहुँचा जा सकता है।
सुजानगढ़, सीकर या रतनगढ़ रेलवे स्टेशन से हर समय टैक्सियां और बसें मिलती हैं।
दिल्ली, जयपुर, बीकानेर और जोधपुर से उत्तम राष्ट्रीय राजमार्ग कनेक्टिविटी।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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