
सती के दाहिने पैर का अंगूठा · माँ भूतधात्री युगाद्या व क्षीरकंठ भैरव · पावन क्षीर सरोवर
क्षीरग्रामे युगाद्या सा क्षीरकण्ठस्तु भैरवः। पादाङ्गुष्ठं पपातात्र सर्वकामफलप्रदा॥
भावार्थ: क्षीरग्राम में सती के पाँव का अंगूठा गिरा जहाँ युगाद्या देवी और क्षीरकंठ भैरव सब मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
सती के पाँव का अंगूठा गिरने से यह स्थल समस्त सिद्धियों और कष्ट निवारण का परम केंद्र बन गया।
रामायण काल में अहिरावण ने भगवान श्री राम और लक्ष्मण की बलि देने हेतु पाताल में इसी देवी की प्रतिष्ठा की थी। महाबली हनुमान जी ने अहिरावण का वध कर प्रभु श्री राम के चरणों में देवी को प्रस्तुत किया, जिन्होंने देवी को क्षीरग्राम में प्रतिष्ठित होने का आदेश दिया।
पवित्र क्षीर सरोवर जिसमें माता का पाषाण विग्रह वर्ष भर समाधिस्थ रहता है और वर्ष में केवल एक दिन वैशाख संक्रांति महामेले में बाहर आता है।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| नित्य महापूजा | प्रातः 06:30 | प्रतीक चरण पादुका अभिषेक |
| संध्या आरती | सायं 06:45 | सरोवर तट पर शंखनाद व दीपदान |
धोती-कुर्ता या सादे परिधान
साड़ी या सलवार सूट
💡 क्षीर सरोवर की पावन मर्यादा का पालन करें।
वर्ष में एकमात्र दिन सरोवर से माता के विग्रह का बाहर आगमन
विशेष नवचंडी अनुष्ठान
कोलकाता एयरपोर्ट से सड़क या रेल मार्ग द्वारा 3.5 घंटे में क्षीरग्राम पहुँचा जा सकता है।
बर्धमान-कटवा रेलमार्ग पर कैचर स्टेशन है जहाँ से 10 मिनट में टोटो/रिक्शा मिलता है।
बर्धमान शहर (40 किमी) और कटवा (20 किमी) से नियमित बस सेवा उपलब्ध है।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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