51 महाशक्तिपीठों का सर्वोच्च महापीठ · तांत्रिक साधना का प्रमुख केंद्र · गुवाहाटी
कामाख्ये कामसम्पन्ने कामेशि वरदायिनि। कामरूपे मनोवाञ्छां पूरय त्वं नमोऽस्तु ते॥
भावार्थ: हे कामाख्या! समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाली, काम की स्वामिनी और वरदायिनी, हे कामरूपिणी माँ! मेरी समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करो, आपको कोटि-कोटि नमन है।
दक्ष प्रजापति के यज्ञ में जब माता सती ने आत्मदाह किया, तब भगवान शिव उनके पार्थिव शरीर को लेकर तांडव करने लगे। संसार को प्रलय से बचाने हेतु भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को 51 भागों में विभक्त किया। नीलाचल पर्वत पर सती की योनि गिरी, जो सृजन और मातृशक्ति का परम केंद्र बनी। कामदेव ने अपने भस्म होने के बाद यहीं तपस्या कर पुनः रूप पाया, इसलिए यह क्षेत्र "कामरूप" कहलाया।
कालिका पुराण और योगिनी तंत्र में कामाख्या महापीठ का विस्तृत वर्णन है। यह दस महाविद्याओं (काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगुलामुखी, मातंगी, कमला) की पावन भूमि है। आदि शंकराचार्य ने यहाँ आकर माता की वंदना की थी। प्रतिवर्ष जून माह में आयोजित "अंबुबाची मेला" पूरे विश्व में प्रसिद्ध है।
मंदिर का शिखर गोल गुंबदकार है जो असमिया और मुगल स्थापत्य का मिश्रण "नीलाचल शैली" कहलाता है। मुख्य मंदिर का गर्भगृह भूतल से 20 फीट नीचे एक प्राकृतिक गुफा में स्थित है, जहाँ मंद प्रकाश में झरने से अनवरत बहते जल के बीच योनि-मुद्रा शिला के स्पर्श दर्शन होते हैं।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| प्रातः कालीन नित्य पूजा | प्रातः 05:30 - 06:30 | प्रातः स्नान एवं अभिषेक |
| मध्याह्न भोग आरती | दोपहर 01:00 - 02:30 | माता को महाभोग अर्पण |
| संध्या आरती | सूर्यास्त के समय | धूप, दीप और शंख ध्वनि से आरती |
धोती-कुर्ता या शालीन पैंट-शर्ट।
साड़ी या सलवार-कमीज। पश्चिमी छोटे वस्त्र पूर्णतः वर्जित हैं।
💡 गर्भगृह में प्रवेश के लिए जलमग्न संकरी सीढ़ियों से उतरना होता है, अतः वृद्धजनों को सावधानी बरतनी चाहिए।
माँ कामाख्या का वार्षिक रजोधर्म उत्सव, 3 दिन पट बंद रहते हैं और चौथे दिन लाल अंगवस्त्र (रक्त वस्त्र) प्रसादम मिलता है
15 दिनों तक चलने वाली अखंड वैदिक एवं तांत्रिक महापूजा
पारंपरिक शामनिक देवधानी नृत्य का अलौकिक प्रदर्शन
गुवाहाटी एयरपोर्ट देश के सभी प्रमुख महानगरों से सीधे जुड़ा है। एयरपोर्ट से टैक्सी द्वारा 30 मिनट में नीलाचल पहाड़ी पहुँच सकते हैं।
कामाख्या जंक्शन रेलवे स्टेशन पहाड़ी के ठीक नीचे है जहाँ से ऑटो या टैक्सी से 10 मिनट में मंदिर पहुँचा जा सकता है।
शिलांग, तेजपुर, सिलीगुड़ी और कोलकाता से शानदार नेशनल हाईवे कनेक्टिविटी। पहाड़ी पर ऊपर जाने हेतु बसें और टैक्सियां उपलब्ध हैं।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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