
51 महाशक्तिपीठों में माँ का हृदय पीठ · जहाँ कोई मूर्ति नहीं, वीसा यंत्र की होती है पूजा · गुजरात
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥ जय आद्यशक्ति माँ अम्बे!॥
भावार्थ: हे समस्त मंगलों को सिद्ध करने वाली, कल्याणकारिणी, समस्त पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली, शरणागतवत्सला, त्रिणयना गौरी नारायणी! आपको कोटि-कोटि नमन है।
दक्ष यज्ञ विध्वंस के उपरांत जब विष्णु जी ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के अंग काटे, तब गब्बर पहाड़ी पर माता का हृदय गिरा। यहाँ 51 अखंड ज्योतियां जलती हैं। गब्बर पर्वत पर माता के पावन चरण पादुकाएं और अखंड दिव्य ज्योति के दर्शन होते हैं जहाँ पहुँचने हेतु 999 सीढ़ियां या आधुनिक रोपवे उपलब्ध है।
श्रीमद्भागवत के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का मुंडन संस्कार यहीं गब्बर पर्वत पर संपन्न हुआ था। भगवान श्री राम और लक्ष्मण सीता जी की खोज के दौरान यहाँ आए थे और माता अम्बाजी ने उन्हें रावण वध हेतु "अजय बाण" प्रदान किया था। मंदिर के शिखर पर 358 स्वर्ण कलश जगमगाते हैं।
विशाल संगमरमर का मंदिर। गर्भगृह में स्थापित "श्री वीसा यंत्र" पर कुरियर वस्त्रों और आभूषणों से ऐसा श्रृंगार किया जाता है कि श्रद्धालुओं को साक्षात माँ अम्बे की चतुर्भुज प्रतिमा के दर्शन की अनुभूति होती है।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| मंगला आरती | प्रातः 07:00 - 07:30 | प्रातःकालीन जागरण आरती |
| राजभोग आरती | दोपहर 12:00 बजे | नैवेद्य अर्पण |
| संध्या महाआरती | सायं 07:00 - 07:30 | दीपों से भव्य महाआरती |
धोती-कुर्ता या शालीन पैंट-शर्ट।
साड़ी या सलवार-सूट।
💡 गब्बर पहाड़ी पर जाने हेतु आधुनिक केबल कार (रोपवे) की सुविधा उपलब्ध है।
30 लाख से अधिक पदयात्री ध्वजा लेकर माता के द्वार आते हैं
9 रातों तक विशाल चाचर चौक में दिव्य गरबा नृत्य
छप्पन भोग एवं राजसी श्रृंगार
अहमदाबाद या उदयपुर एयरपोर्ट से 3 घंटे में टैक्सी या बस से अम्बाजी पहुँच सकते हैं।
आबू रोड रेलवे स्टेशन दिल्ली-मुंबई मुख्य रेलमार्ग पर है जहाँ से हर 5 मिनट पर अम्बाजी हेतु बसें व टैक्सियां मिलती हैं।
अहमदाबाद (180 किमी), पालनपुर (65 किमी) और माउंट आबू (45 किमी) से शानदार 4-लेन सड़कें।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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