
51 शक्तिपीठों में मणिकर्णिका महापीठ · कर्ण कुंडल पीठ
विशालाक्षी महाभागे काशीपुरनिवासिनी। प्रसीद मे जगद्धात्रि मोक्षदा भव सर्वदा॥
भावार्थ: हे काशीपुरनिवासिनी विशालाक्षी देवी! मुझ पर प्रसन्न होइए और मुझे सदा के लिए मोक्ष प्रदान कीजिए।
सती के कर्ण आभूषण यहाँ गिरे थे। भगवान शिव ने स्वयं काल भैरव को इस पीठ की रक्षा हेतु नियुक्त किया। माँ के विशाल नेत्र करुणा और मोक्ष की वर्षा करते हैं।
स्कंद पुराण के काशी खंड में विशालाक्षी देवी की महिमा का विशद वर्णन है। काशी यात्रा तभी पूर्ण मानी जाती है जब विश्वनाथ और विशालाक्षी दोनों के दर्शन किए जाएं।
मंदिर में गोपुरम शैली का सुंदर प्रवेश द्वार है। गर्भगृह में माँ की दो मूर्तियां हैं—एक प्राचीन स्वयंभू शिला और पीछे भव्य पाषाण विग्रह।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| मंगला आरती | प्रातः 05:30 - 06:00 | प्रातः पूजन |
| संध्या आरती | सायं 06:30 - 07:15 | दीपदान आरती |
| शयन आरती | रात्रि 09:30 - 10:00 | रात्रि आरती |
पारंपरिक सात्विक परिधान।
साड़ी या सलवार-सूट।
💡 काशी की संकरी गलियों में पैदल चलना होता है।
माँ विशालाक्षी का विशेष वार्षिकोत्सव
अखंड कुंकुम अर्चन
वाराणसी एयरपोर्ट से टैक्सी द्वारा गोदौलिया चौक तक आएं, वहाँ से मीर घाट पैदल 10 मिनट।
कैंट स्टेशन से ऑटो या ई-रिक्शा द्वारा गोदौलिया चौराहे तक।
काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर से मात्र 5 मिनट की पैदल दूरी।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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