
51 शक्तिपीठों में सिद्ध त्रिकोण धाम · कजला देवी
नन्दगोपगृहे जाता यशोदागर्भसम्भवा। ततस्तौ नाशयिष्यामि विन्ध्याचलनिवासिनी॥
भावार्थ: नंदगोप के घर यशोदा के गर्भ से प्रकट होकर दुष्टों का नाश करने वाली माँ विंध्यवासिनी को नमन है।
माँ यशोदा के गर्भ से उत्पन्न योगमाया जब कंस द्वारा शिला पर पटकी गईं, तब वे अष्टभुजा रूप में प्रकट होकर कंस के अंत की घोषणा कर विंध्याचल में स्थापित हुईं।
यहाँ का "त्रिकोण यंत्र" परिक्रमा (माँ विंध्यवासिनी, माँ कालीखोह और माँ अष्टभुजा) तंत्र एवं भक्ति का अद्वितीय संगम है।
नव-निर्मित भव्य विंध्य कॉरिडोर चुनार के गुलाबी बलुआ पत्थरों से सुशोभित है, जो गंगा घाट को सीधे मंदिर परिक्रमा से जोड़ता है।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| मंगला आरती | प्रातः 04:00 - 05:00 | प्रातः काल की प्रथम महाआरती |
| राजभोग आरती | दोपहर 12:00 - 01:30 | मध्याह्न भोग |
| संध्या आरती | सायं 07:15 - 08:15 | दीप महाआरती |
| बड़ी आरती (शयन) | रात्रि 10:30 - 11:00 | दिन की अंतिम आरती |
धोती-कुर्ता या सात्विक वस्त्र।
साड़ी या सलवार-सूट।
💡 त्रिकोण परिक्रमा (कालीखोह व अष्टभुजा) नंगे पांव करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।
लाखों भक्तों द्वारा त्रिकोण परिक्रमा
विंध्य क्षेत्र का लोक संगीत व कजरी उत्सव
वाराणसी एयरपोर्ट से 4-लेन हाईवे द्वारा 1.5 घंटे में विंध्याचल पहुँच सकते हैं।
हावड़ा-दिल्ली मुख्य रेलमार्ग पर विंध्याचल व मीरजापुर स्टेशन सीधे जुड़े हैं।
वाराणसी (65 किमी) और प्रयागराज (85 किमी) से बेहतरीन बस व टैक्सी सेवा।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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