108 दिव्य देशमों में विख्यात · अथि वरदर का दिव्य वैकुंठ धाम
शंखचक्रगदापाणिं पीताम्बरधरं हरिम्। हस्तिशैलशिखाकान्तं वरदं समुपास्महे॥
भावार्थ: हस्तिशैल पर्वत के शिखर पर विराजमान, शंख-चक्र-गदा धारण करने वाले, पीतांबरधारी भगवान वरदराज को हम भजते हैं।
ब्रह्मा जी ने अश्वमेध यज्ञ किया था जिसके यज्ञ कुंड से भगवान वरदराज चतुर्भुज रूप में प्रकट हुए। भगवान ने ब्रह्मा जी को वरदान दिया, अतः वे "वरदराज" कहलाए।
रामानुजाचार्य जी ने यहीं श्री तिरुकच्ची नम्बी से दीक्षा प्राप्त की थी। आलवार संतों द्वारा मंगलाशासन से स्तुत दिव्य देशम है।
100 स्तंभों वाला अद्वितीय मंडप जिसमें एक ही पत्थर से तराशी गई जंजीरें (Stone Chains) हैं। छत पर सोने और चांदी की दो छिपकलियां हैं जिन्हें छूने से समस्त दोष मिटते हैं।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| विश्वरूप सेवा | प्रातः 06:00 - 06:30 | प्रातः दर्शन |
| कालसन्धि पूजा | प्रातः 08:00 - 08:30 | दैनिक पूजा |
| सायराक्षै पूजा | सायं 06:00 - 06:45 | संध्या आरती |
| अर्थजाम पूजा | रात्रि 08:00 - 08:30 | शयन आरती |
धोती और उत्तरीय।
साड़ी या सलवार।
💡 हस्तिगिरि टीले पर सीढ़ियां चढ़नी होती हैं।
सरोवर से 40 वर्ष बाद प्रकटीकरण, करोड़ों भक्त
गरुड़ वाहन पर भगवान की महाशोभायात्रा
चेन्नई हवाई अड्डे से कार द्वारा 1.5 घंटे में कांचीपुरम पहुंचा जा सकता है।
चेन्नई उपनगरीय एवं एक्सप्रेस ट्रेनों से जुड़ा है।
चेन्नई-बेंगलुरु नेशनल हाईवे से सुगम पहुंच।
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