सती का बायाँ पैर (वाम पाद) · माँ भ्रामरी व ईश्वर भैरव · पावन तीस्ता नदी तट
त्रिस्रोतायां वामपादो भ्रामरीश्वरो भैरवः। सर्वशत्रुविनाशाय भक्तानां वरदायिनी॥
भावार्थ: त्रिस्रोता में सती का बायाँ पैर गिरा जहाँ भ्रामरी देवी और ईश्वर भैरव समस्त शत्रुओं का नाश करते हैं।
सती का वाम पाद गिरने से यह संपूर्ण तराई क्षेत्र महाशक्ति के संरक्षण में आ गया।
माँ भ्रामरी ने करोड़ों भौरों (भ्रमर) का रूप धारण कर अरुणासुर नामक महादैत्य का वध किया था। तीस्ता नदी को प्राचीन काल में त्रिस्रोता (तीन धाराओं वाली) कहा जाता था।
तीस्ता नदी के सुंदर प्राकृतिक तट पर स्थित मंदिर जहाँ माता भ्रामरी का दिव्य विग्रह स्थापित है।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| प्रातः मंगला आरती | प्रातः 06:30 | चरण पाद प्रक्षालन व अभिषेक |
| संध्या आरती | सायं 06:45 | पारंपरिक धूप व शंख वादन |
धोती-कुर्ता या सादे वस्त्र
साड़ी या सलवार सूट
💡 तीस्ता नदी के तीव्र बहाव के समीप सावधानी बरतें।
अखंड पाठ व शतचंडी महायज्ञ
तीस्ता नदी में हजारों श्रद्धालुओं का पावन स्नान
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