
51 शक्तिपीठों में पावन दक्षिण पाद पीठ · माताबड़ी
ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुरसुन्दर्यै नमः। नमस्ते वरदे देवि भक्तानन्दप्रदायिनि॥
भावार्थ: भक्तों को परमानंद प्रदान करने वाली माँ त्रिपुर सुंदरी! आपको कोटिशः नमन।
राजा धन्य माणिक्य को स्वप्न में माँ ने दर्शन देकर चित्तौड़गढ़ से इस पाषाण मूर्ति को लाकर यहाँ स्थापित करने का आदेश दिया था।
माणिक्य राजवंश की कुलदेवी। मंदिर के पीछे विशाल "कल्याण सागर" सरोवर है जिसमें सैकड़ों वर्ष पुरानी पवित्र कछुओं की प्रजातियां निवास करती हैं।
चार-चाला छत शैली का वर्गाकार मंदिर। गर्भगृह में कसौटी पत्थर की माँ त्रिपुर सुंदरी की 5 फीट ऊँची प्रतिमा तथा छोटी प्रतिमा "छोटी माँ" विराजमान हैं।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| मंगला आरती | प्रातः 05:30 - 06:00 | प्रातः आरती |
| भोग आरती | दोपहर 12:30 - 01:00 | अन्न भोग |
| संध्या आरती | सायं 06:30 - 07:15 | संध्या दीप आरती |
धोती-कुर्ता या सात्विक वस्त्र।
साड़ी या सलवार-सूट।
💡 सरोवर की स्वच्छता बनाए रखें।
पूर्वोत्तर का सबसे बड़ा 3 दिवसीय दीपोत्सव, लाखों श्रद्धालु
अखंड शक्ति आराधना
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