
51 शक्तिपीठों में सिद्ध तांत्रिक पीठ · तीसरा नेत्र (नयन) पीठ
ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट्। ऐं ॐ ह्रीं क्रीं हुं फट्॥
भावार्थ: हे भवतारिणी माँ तारा! मुझे अज्ञान और भय से मुक्त कर परम ज्ञान प्रदान करो।
समुद्र मंथन के समय जब भगवान शिव ने हलाहल विष का पान किया, तब माँ तारा ने उन्हें स्तनपान कराकर विष के प्रभाव को शांत किया था। यहाँ माँ का मातृ-स्नेहमयी रूप पूजित है।
महर्षि वशिष्ठ ने यहाँ तारा मंत्र से सिद्धि प्राप्त की थी। 19वीं सदी के महान तांत्रिक संत बामाखेपा ने माँ तारा को साक्षात अपनी माता मानकर साधना की और सिद्धि पाई।
लाल ईंटों से निर्मित आठ-चाला मंदिर। मंदिर के समीप ही प्रसिद्ध महाश्मशान है, जिसे तांत्रिक साधना हेतु भारत के सर्वाधिक जाग्रत स्थलों में गिना जाता है।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| मंगला आरती | प्रातः 06:00 - 06:30 | प्रातः पूजन |
| अन्न भोग आरती | दोपहर 01:00 - 01:30 | महाभोग अर्पण |
| संध्या आरती | सायं 06:30 - 07:15 | दीप व धूप महाआरती |
धोती-कुर्ता या सात्विक वस्त्र।
साड़ी या सलवार-सूट।
💡 श्मशान क्षेत्र में मर्यादा बनाए रखें।
वर्ष का सबसे बड़ा महायोग, लाखों साधक उपस्थित
अखंड तांत्रिक महापूजन
कोलकाता या दुर्गापुर एयरपोर्ट से टैक्सी द्वारा 3.5 घंटे में पहुँचा जा सकता है।
हावड़ा व सियालदह से रामपुरहाट हेतु प्रतिदिन दर्जनों एक्सप्रेस ट्रेनें उपलब्ध हैं।
कोलकाता से 220 किमी, शांतिनिकेतन से 80 किमी।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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