
पुष्टिमार्ग का सर्वोच्च महातीर्थ · गोवर्धनधारी 7 वर्षीय बाल स्वरूप श्रीकृष्ण
श्रीकृष्णः शरणं मम। नमामि हृदये शेषे लीलाक्षीराब्धिशायिनम्। लक्ष्मीसहस्रलीलाभिः सेव्यमानं कलानिधिम्॥
भावार्थ: श्रीकृष्ण ही मेरी एकमात्र शरण हैं। हृदय में विराजमान, अनंत लीलाओं के सागर भगवान श्रीकृष्ण को मेरा कोटिशः नमन है।
इंद्र के कोप से ब्रजवासियों की रक्षा हेतु 7 दिन और 7 रात तक कनिष्ठा अंगुली पर गोवर्धन पर्वत धारण करने वाली अलौकिक बाल लीला का यह साक्षात विग्रह है। होंठों के नीचे एक चमचमाता हीरा सुशोभित है।
महाप्रभु वल्लभाचार्य जी ने गोवर्धन पर्वत पर इस दिव्य विग्रह की खोज की थी। मुग़ल आक्रांताओं से रक्षा हेतु 1672 में जब रथ मेवाड़ पहुँचा, तो सिंहार गांव में रथ का पहिया कीचड़ में धंस गया—भगवान की इच्छा मानकर वहीं भव्य "श्रीनाथजी हवेली" का निर्माण हुआ।
यह मंदिर किसी राजमहल या किले जैसा नहीं, बल्कि नंदबाबा के घर ("नंदालय") की तरह बनाया गया है जिसमें 8 अलग-अलग झांकियों (मंगला, श्रृंगार, ग्वाल, राजभोग, उत्थापन, भोग, संध्या, शयन) में दर्शन होते हैं।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| मंगला दर्शन | प्रातः 05:30 | प्रातः काल भगवान को जगाने की झांकी |
| राजभोग दर्शन | दोपहर 11:30 - 12:15 | दिन का सबसे भव्य राजसी श्रृंगार व भोग दर्शन |
| शयन दर्शन | सायं 07:00 - 07:30 | रात्रि विश्राम व अंतिम आरती |
धोती-कुर्ता या सादे पारम्परिक वस्त्र
साड़ी या सलवार सूट
💡 झांकी के समय दर्शनार्थियों की भीड़ में संयम बनाए रखें।
विशाल चावल का पर्वत भोग व आदिवासी भील समुदाय द्वारा अन्नकूट लूट
तोपों की सलामी व दही-हल्दी की होली
उदयपुर एयरपोर्ट से 45 मिनट में राष्ट्रीय राजमार्ग 58 द्वारा नाथद्वारा पहुंचा जा सकता है।
उदयपुर सिटी स्टेशन देश के सभी बड़े शहरों से जुड़ा है जहाँ से 50 मिनट में टैक्सी/बस उपलब्ध है।
जयपुर (350 किमी), अहमदाबाद (300 किमी) और उदयपुर से 4-लेन उत्कृष्ट राजमार्ग है।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
श्रीनाथजी मंदिर (नाथद्वारा, राजस्थान) पूजा किट देखें🔱 श्रीनाथजी मंदिर (नाथद्वारा, राजस्थान) दर्शन / पूजा हेतु पंडित बुक करें