51 शक्तिपीठों में कंठ हार महापीठ · त्रिकूट पर्वत पर विद्यादात्री
शारदा शारदांभोजवदना वदनांबुजे। सर्वदा सर्वदास्माकं सन्निधिं सन्निधिं क्रियात्॥
भावार्थ: शरद ऋतु के कमल के समान मुख वाली माँ शारदा! हमारे मुख-कमल में सर्वदा विद्या रूप में निवास करें।
सती के कंठ का स्वर्ण हार यहाँ त्रिकूट पर्वत पर गिरा था। यहाँ माँ शारदा विद्या, संगीत और ज्ञान की अधिष्ठात्री रूप में पूजित हैं। प्रख्यात संगीतज्ञ उस्ताद अलाउद्दीन खां भी यहीं माँ की वंदना करते थे।
बुंदेलखंड के अमर योद्धा आल्हा और ऊदल माँ शारदा के अनन्य भक्त थे। आल्हा ने माँ को प्रसन्न कर अमरता का वरदान पाया था।
त्रिकूट पर्वत के शीर्ष (600 फीट) पर स्थित मंदिर। ऊपर तक जाने हेतु 1063 सीढ़ियां एवं आधुनिक रोपवे (उड़नखटोला) की सुविधा उपलब्ध है।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| मंगला आरती | प्रातः 05:00 - 05:45 | प्रातः आरती |
| संध्या आरती | सायं 07:00 - 07:45 | संध्या महाआरती |
| शयन आरती | रात्रि 09:00 - 09:30 | शयन |
शालीन सात्विक वस्त्र।
साड़ी या सलवार-सूट।
💡 सीढ़ियां चढ़ने में असमर्थ श्रद्धालुओं हेतु रोपवे उत्तम विकल्प है।
लाखों श्रद्धालु पैदल यात्रा कर आते हैं
माँ सरस्वती के रूप में विद्या पूजन
जबलपुर या खजुराहो एयरपोर्ट से टैक्सी द्वारा 3 घंटे में मैहर पहुँच सकते हैं।
मैहर रेलवे स्टेशन मुंबई-हावड़ा रेलमार्ग पर स्थित है, सभी प्रमुख एक्सप्रेस ट्रेनें यहाँ रुकती हैं।
सतना (40 किमी), कटनी (65 किमी) और रीवा (85 किमी) से राष्ट्रीय राजमार्ग द्वारा सुगम।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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