सती की दाहिनी भुजा (हाथ) · माँ भ्रामरी सप्तशृंगी व सर्वसिद्धीश भैरव · सात पर्वत शिखर
जनस्थाने कर्णनासा भ्रामरी सर्वसिद्धीशः। अष्टादशभुजा देवी सप्तशृङ्गनिवासिनी॥
भावार्थ: सप्तशृंग पर्वत पर अठारह भुजाओं वाली भ्रामरी देवी और सर्वसिद्धीश भैरव विराजते हैं जो सब सिद्धियाँ देते हैं।
महिषासुर वध के समय देवताओं के सभी अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित होकर माँ 18 भुजाओं में प्रकट हुईं और उस दैत्य का संहार कर पर्वत पर प्रतिष्ठित हुईं।
महाराष्ट्र की साढ़े तीन शक्तिपीठों में से यह अर्धपीठ (आधा शक्तिपीठ) माना जाता है। छत्रपति शिवाजी महाराज माता के दर्शन हेतु यहाँ पधारे थे। महर्षि मार्कंडेय ने सप्तशती की रचना हेतु इसी पर्वत पर तप किया था।
पहाड़ की प्राकृतिक चट्टान पर तराशी गई 8 फीट (2.4 मीटर) ऊंची सिंदूर लेपित अठारहभुजी दिव्य प्रतिमा जिसके 18 हाथों में विभिन्न दिव्य अस्त्र हैं। पर्वत पर पहुंचने के लिए आधुनिक फ्यूनिक्युलर ट्रॉली (Funicular Train) की सुविधा है।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| काकड़ आरती | प्रातः 05:30 | प्रातः काल सिंदूर व पंचामृत लेपन |
| महा आरती | दोपहर 12:00 | पूरनपोली नैवेद्य व राजसी भोग |
| संध्या आरती | सायं 07:00 | पहाड़ी पर शंखनाद व दीप उत्सव |
धोती-कुर्ता, पायजामा या सादे शालीन वस्त्र
साड़ी या सलवार सूट
💡 पहाड़ी चढ़ाई के समय रेलिंग का ध्यान रखें।
लाखों पदयात्रियों का नासिक व खानदेश से पैदल आगमन
कोजागिरी पूर्णिमा पर ध्वजारोहण व महापूजा
नासिक एयरपोर्ट से 1 घंटे में कैब द्वारा वाणी पर्वत तलहटी पहुँचा जा सकता है।
नासिक रोड रेलवे स्टेशन से वाणी (नांदगांव मार्ग) के लिए निरंतर बसें और निजी टैक्सियां उपलब्ध हैं।
नासिक शहर (60 किमी) से राज्य परिवहन (MSRTC) की सीधी बसें मंदिर तक जाती हैं।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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