
सती का कंठहार (अस्थि हार) · माँ नंदिनी व नंदिकेश्वर भैरव · मयूराक्षी तट
नन्दिपुरे हारपातात् नन्दिनी सा महादेवी। नन्दिकेश्वरश्च भैरवो भक्तानां वरदायकः॥
भावार्थ: नंदीपुर (सेंथिया) में सती का हार गिरा जहाँ नंदिनी देवी और नंदिकेश्वर भैरव भक्तों को वरदान देते हैं।
सती का हार यहाँ गिरने से यह स्थान भक्तों के सर्व सौभाग्य और मंगल का प्रदाता माना जाता है।
नंदी (भगवान शिव के वाहन) ने यहाँ माता नंदिनी की आराधना कर सिद्धि प्राप्त की थी, जिससे भैरव का नाम "नंदिकेश्वर" पड़ा। मंदिर के प्रांगण में एक विशाल पावन वटवृक्ष है जहाँ लाल धागा बांधकर मन्नत मांगी जाती है।
गर्भगृह में एक बड़ी शिला खंड सिंदूर से लेपित है जिसके ऊपर माता का चांदी का मुकुट और तीन पावन नेत्र सुशोभित हैं।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| मंगला आरती | प्रातः 06:00 | अभिषेक व सिंदूर श्रृंगार |
| संध्या आरती | सायं 07:00 | ढाक वादन व दीप प्रज्वलन |
धोती-कुर्ता या सादे परिधान
साड़ी या सलवार सूट
💡 वटवृक्ष के समीप श्रद्धापूर्वक मौन बनाए रखें।
भव्य मेला व अन्नकूट भोग
हजारों भक्तों को महाप्रसाद वितरण
कोलकाता या अंदाल एयरपोर्ट से सड़क या रेल मार्ग द्वारा सुलभ पहुंचा जाता है।
सेंथिया जंक्शन हावड़ा-साहिबगंज मुख्य रेलमार्ग पर है। स्टेशन से रिक्शा द्वारा 5 मिनट।
सिउड़ी (35 किमी), बोलपुर (45 किमी) और रामपुरहाट (40 किमी) से सीधी बसें हैं।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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