सती की कंठ नली (नला / श्वास नली) · माँ कालिका नलाटेश्वरी व योगेश भैरव · ब्रह्मशिला
नलाहाट्यां नलापातात् कालिका योगेशो हरः। कण्ठनाली स्थिता यत्र वाणीसिद्धिप्रदायिनी॥
भावार्थ: नलहाटी में सती की कंठ नली गिरी जहाँ कालिका देवी और योगेश भैरव वाणी की सिद्धि प्रदान करते हैं।
सती की कंठ नली गिरने से इस नगर का नाम "नलहाटी" पड़ा। यहाँ माँ वाणी और कंठ दोष निवारण की अधिष्ठात्री देवी हैं।
मान्यता है कि गर्भगृह में माता की कंठ शिला के नीचे से निरंतर एक दिव्य जलधारा प्रवाहित होती है जिसे कितना भी निकाला जाए वह कभी समाप्त नहीं होती।
पहाड़ी के ऊपर स्थित मंदिर जिसके गर्भगृह में माँ काली का स्वर्णिम मुकुट युक्त भव्य विग्रह और पावन कंठ-शिला प्रतिष्ठित है।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| मंगला आरती | प्रातः 06:00 | कंठ शिला अभिषेक व सिंदूर लेपन |
| दोपहर भोग आरती | दोपहर 12:00 | अन्न भोग व पायेश नैवेद्य |
| संध्या आरती | सायं 07:00 | पारंपरिक ढाक वादन व चंडी स्तुति |
धोती-कुर्ता या सादे शालीन वस्त्र
साड़ी या सलवार सूट
💡 पहाड़ी परिसर में शांति बनाए रखें।
दीपावली की रात भव्य तंत्र महायज्ञ
वार्षिक स्थापना दिवस व महाभोग वितरण
कोलकाता या अंदाल से ट्रेन द्वारा सीधे नलहाटी जंक्शन पहुँचा जा सकता है।
हावड़ा-मालदा-गुवाहाटी मुख्य रेलमार्ग पर नलहाटी जंक्शन स्थित है। स्टेशन से ई-रिक्शा द्वारा 5 मिनट।
रामपुरहाट (15 किमी) और तारापीठ (22 किमी) से चौबीसों घंटे बसें व ऑटो उपलब्ध हैं।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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