
सती के दोनों मणिबंध (कलाई) · माँ गायत्री व सर्वानंद भैरव · पुष्कर राज
मणिवन्धे च गायत्री सर्वानन्दस्तु भैरवः। पुष्करे च स्थिता देवी सर्वपापप्रणाशिनी॥
भावार्थ: पुष्कर के मणिवंध तीर्थ में गायत्री देवी और सर्वानंद भैरव विराजते हैं जो समस्त पापों का नाश करते हैं।
सती के दोनों हाथों के कलाई भाग (मणिबंध) यहाँ गिरे थे। ब्रह्मा जी के यज्ञ में जब सावित्री जी समय पर नहीं पहुंचीं, तब गायत्री जी ने यज्ञ पत्नी का स्थान ग्रहण किया था।
यहाँ गायत्री और सावित्री दोनों देवियों के सिद्ध मंदिर हैं। महर्षि विश्वामित्र ने गायत्री मंत्र की सिद्धि इसी पावन क्षेत्र में प्राप्त की थी।
पहाड़ी ढलान पर श्वेत संगमरमर का अलौकिक मंदिर जहाँ से पुष्कर सरोवर और थार मरुस्थल का विहंगम दृश्य दिखाई देता है।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| प्रातः गायत्री महाआरती | प्रातः 06:00 | गायत्री मंत्र जप व वैदिक हवन |
| संध्या आरती | सायं 07:00 | पुष्कर सरोवर के सम्मुख दीप प्रज्वलन |
धोती-कुर्ता या सादे वस्त्र
साड़ी, लहंगा या सलवार-सूट
💡 सरोवर घाटों और मंदिर में जूते-चप्पल पहले ही उतारें।
लाखों दीपों से सरोवर का महास्नान व दीपदान
अखंड गायत्री महामंत्र अनुष्ठान
किशनगढ़ या जयपुर एयरपोर्ट से टैक्सी द्वारा 1 से 2.5 घंटे में पुष्कर पहुँचा जा सकता है।
अजमेर जंक्शन देश के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा है, जहाँ से 30 मिनट में पुष्कर बस या टैक्सी मिलती है।
जयपुर, जोधपुर और उदयपुर से राजस्थान रोडवेज की उत्कृष्ट बस सेवा उपलब्ध है।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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