सती का दायाँ वक्ष (स्तन भाग) · माँ दाक्षायणी व अमर भैरव · पवित्र कैलाश मानसरोवर
मानसे दक्षजाया सा ह्यमरो भैरवः स्मृतः। दक्षिणे स्तनपातेन सर्वमुक्तिप्रदायिनी॥
भावार्थ: मानसरोवर में सती का दायाँ स्तन गिरा जहाँ दाक्षायणी देवी और अमर भैरव साक्षात मोक्ष प्रदान करते हैं।
दक्ष कन्या होने के कारण माता को यहाँ "दाक्षायणी" कहा गया। सती का वक्ष गिरने से यह झील अमृतमयी बन गई जिसके जल आचमन मात्र से जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं।
ब्रह्मा जी के मन के संकल्प से उत्पन्न यह झील विश्व की सबसे पवित्र और स्वच्छ मीठे पानी की झील मानी जाती है। हंसों की क्रीड़ा स्थली यह झील मोक्ष का साक्षात द्वार है।
प्राकृतिक नीलमणि जैसी पारदर्शी विशाल झील जिसके जल में कैलाश पर्वत के स्वर्णिम शिखर का प्रतिबिंब दिखाई देता है।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| ब्रह्ममुहूर्त मानस आरती | प्रातः 04:30 | कैलाश सम्मुख दीपदान व ध्यान |
| संध्या आरती | सायं 06:30 | झील तट पर कपूर ज्योति व महामृत्युंजय जप |
थर्मल अंतःवस्त्र, डाउन फेदर जैकेट, गर्म टोपी, ट्रैकिंग जूते
गर्म विंटर वियर, विंडप्रूफ जैकेट, दस्ताने
💡 अत्यधिक ठंड और ऊंचाई हेतु धीरे-धीरे चलें और कपूर सूंघें।
कैलाश परिक्रमा व मानसरोवर महास्नान
हजारों साधकों द्वारा अखंड ध्यान
काठमांडू से नेपालगंज-सिमिकोट होकर हेलीकॉप्टर द्वारा हिल्सा सीमा, फिर वहाँ से चीनी सीमा में प्रवेश।
काठमांडू से सड़क मार्ग द्वारा रसुवागढ़ी/केरुंग सीमा होकर मानसरोवर पहुंचा जाता है।
उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे द्वारा भारत सरकार की आधिकारिक पैदल/जीप यात्रा मार्ग।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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