51 शक्तिपीठों में करवीर महापीठ · दक्षिण की काशी
नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते। शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥
भावार्थ: हे श्रीपीठ पर विराजमान, देवताओं द्वारा पूजित, हाथों में शंख, चक्र और गदा धारण करने वाली महामाये महालक्ष्मी! आपको कोटिशः नमन।
कोल्हासुर राक्षस के वध हेतु देवी ने यहाँ महालक्ष्मी रूप धारण किया और करवीर क्षेत्र को अभय प्रदान किया।
कहा जाता है कि वैकुंठ में भृगु ऋषि के प्रसंग के पश्चात माता लक्ष्मी रुष्ट होकर यहाँ तपस्या करने आईं थीं। तिरुपति बालाजी के दर्शन तभी पूर्ण माने जाते हैं जब कोल्हापुर महालक्ष्मी के दर्शन किए जाएं।
काले पाषाण से निर्मित हेमाडपंथी वास्तुकला। वर्ष में दो बार (जनवरी व नवंबर) 3 दिन तक अस्ताचलगामी सूर्य की किरणें सीधे देवी प्रतिमा का चरण-स्पर्श करती हैं जिसे "किरणोत्सव" कहा जाता है।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| काकड़ आरती | प्रातः 05:00 - 06:00 | प्रातः मंगल आरती |
| महापूजा व नैवेद्य | दोपहर 11:30 - 12:30 | राजोपचार पूजा |
| अलंकार आरती | सायं 07:00 - 08:00 | स्वर्ण आभूषण श्रृंगार |
| शेज आरती | रात्रि 10:00 - 10:30 | शयन आरती |
धोती-सोला या शालीन कुर्ता-पायजामा।
साड़ी या सलवार-कुर्ता।
💡 गर्भगृह में प्रवेश हेतु पारंपरिक वस्त्र अनिवार्य।
सूर्य रश्मियों द्वारा माँ का साक्षात पाद-वंदन
लाखों दीपों व पालकी उत्सव
कोल्हापुर एयरपोर्ट से मात्र 20 मिनट में मंदिर पहुँचा जा सकता है।
मुंबई, पुणे, बेंगलुरु व तिरुपति से सीधी एक्सप्रेस ट्रेनें।
NH-48 (मुंबई-बेंगलुरु हाईवे) से जुड़ा है। पुणे से 4 घंटे, मुंबई से 7 घंटे।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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