51 शक्तिपीठों में परम सिद्ध पीठ · दक्षिण पाद पीठ
सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
भावार्थ: हे समस्त मंगलों का मंगल करने वाली, कल्याणमयी, शरण देने वाली नारायणी माँ कालिका! आपको बारंबार प्रणाम है।
दक्ष प्रजापति के यज्ञ विध्वंस के उपरांत जब भगवान शिव सती के पार्थिव शरीर को लेकर तांडव कर रहे थे, तब भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से खंडित होकर सती के दाहिने चरण की अंगुलियां यहाँ गिरीं।
कालीघाट मंदिर का उल्लेख 15वीं व 17वीं शताब्दी के ग्रंथों में मिलता है। श्री रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद इस सिद्ध पीठ के नियमित दर्शनार्थी थे। यहाँ नकुलेश भैरव का स्वयंभू मंदिर भी स्थित है।
पारंपरिक बंगाली चार-चाला वास्तुकला। माँ काली की पाषाण प्रतिमा में सोने की तीन आंखें और विशाल स्वर्ण जिह्वा है। समीप ही पवित्र "कुण्डुपुकुर" सरोवर है।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| मंगला आरती | प्रातः 05:00 - 05:30 | दिन की प्रथम आरती |
| राजभोग आरती | दोपहर 01:30 - 02:00 | माँ को अन्न भोग अर्पण |
| संध्या आरती | सायं 06:30 - 07:15 | दीपदान एवं शंख ध्वनि |
| शयन आरती | रात्रि 10:00 - 10:30 | अंतिम आरती |
धोती-कुर्ता या सात्विक पैंट-शर्ट।
साड़ी या सलवार-सूट।
💡 गर्भगृह में प्रवेश के समय सर ढंकना शुभ माना जाता है।
लाखों दीपों व तांत्रिक विधान से महापूजा
नवदिवसीय अखंड शक्ति आराधना
संकट निवारण महाव्रत
कोलकाता एयरपोर्ट से टैक्सी या मेट्रो द्वारा 45 मिनट में कालीघाट पहुँच सकते हैं।
हावड़ा स्टेशन से 10 किमी की दूरी पर है। मेट्रो द्वारा कालीघाट स्टेशन सबसे समीप है।
कोलकाता शहर के सभी भागों से बस, टैक्सी और ट्राम की उत्तम सुविधा उपलब्ध है।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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