सती के हाथ व पैर (हस्तपद्म) · माँ यशोरेश्वरी व चंड भैरव · सुंदरवन सीमांत
यशोरे पाणिपद्मं च यशोरेश्वरी चण्डकः। भक्तानां वरदा नित्यं सर्वकामफलप्रदा॥
भावार्थ: यशोर में सती के हस्तपद्म गिरे जहाँ यशोरेश्वरी देवी और चंड भैरव नित्य भक्तों को सब कामनाओं का फल देते हैं।
सती के पावन हस्त व पाद गिरने से इसे संपूर्ण यश और विजय की अधिष्ठात्री "यशोरेश्वरी" कहा गया।
बंगाल के 12 भुइयानों में सबसे शक्तिशाली राजा प्रतापादित्य ने अपनी राजधानी ईश्वरीपुर में इस शक्तिपीठ का जीर्णोद्धार कराया और 100 खंभों वाला भव्य नाट्य मंदिर बनवाया।
ईंटों और प्रस्तर से निर्मित विशाल ऐतिहासिक मंदिर जिसके पास 100 स्तंभों वाले प्राचीन नाट्य मंडप के अवशेष और पावन कुण्ड स्थित हैं।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| नित्य महापूजा | प्रातः 06:30 | माँ यशोरेश्वरी का सिंदूर व पुष्प श्रृंगार |
| संध्या महाआरती | सायं 06:30 | पारंपरिक शंखनाद, ढाक वादन व दीपदान |
धोती-कुर्ता या सादे परिधान
साड़ी या सलवार सूट
💡 मंदिर की ऐतिहासिक व पुरातात्विक धरोहर की रक्षा करें।
हजारों दीपों से मंदिर का दीपोत्सव व वार्षिक मेला
शतचंडी महायज्ञ व नगर कीर्तन
कोलकाता से घोझाडांगा (बशीरहाट) - भोमरा बॉर्डर होकर मात्र 3 घंटे में ईश्वरीपुर पहुंचा जा सकता है।
कोलकाता से सियालदह-हसनाबाद लोकल ट्रेन द्वारा बशीरहाट/घोझाडांगा बॉर्डर तक यात्रा की जा सकती है।
सातखीरा शहर से श्याम नगर होते हुए ईश्वरीपुर के लिए सीधी बसें व टैक्सियां उपलब्ध हैं।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
यशोरेश्वरी काली शक्तिपीठ (ईश्वरीपुर, बांग्लादेश) पूजा किट देखें🔱 यशोरेश्वरी काली शक्तिपीठ (ईश्वरीपुर, बांग्लादेश) दर्शन / पूजा हेतु पंडित बुक करें