सती के दोनों कपोल (गाल) · माँ विश्वेश्वरी व दण्डपाणि भैरव · दक्षिण गंगा गोदावरी
गण्डपाते सर्वशैले विश्वेशी दण्डपाणिकः। गोदावरीतटे रम्ये सर्वकामार्थसाधनी॥
भावार्थ: गोदावरी तट पर सती के कपोल गिरे, जहाँ विश्वेश्वरी देवी और दण्डपाणि भैरव समस्त कामनाओं को सिद्ध करते हैं।
सती के गाल गिरने से इस क्षेत्र को सौंदर्य और सौभाग्य प्रदाता सिद्ध पीठ की मान्यता मिली।
महर्षि गौतम की तपोभूमि गोदावरी के इस पावन तट पर 12 वर्ष में एक बार "गोदावरी पुष्करालु" महाकुंभ आयोजित होता है जिसमें करोड़ों श्रद्धालु स्नान करते हैं।
गोदावरी घाट के सम्मुख स्थित प्राचीन मंदिर जहाँ कोटिलिंगेश्वर शिवलिंग और देवी विश्वेश्वरी का सुंदर विग्रह स्थित है।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| सुप्रभातम् व अभिषेक | प्रातः 06:00 | गोदावरी जल से महाभिषेक |
| गोदावरी महाआरती | सायं 06:30 | घाट पर भव्य दीप प्रज्वलन |
धोती-कुर्ता या सादे परिधान
साड़ी या सलवार सूट
💡 गोदावरी घाट पर स्वच्छता बनाए रखें।
करोड़ों श्रद्धालुओं का पवित्र नदी स्नान
अखंड जलाभिषेक व चंडी पाठ
राजमुंदरी एयरपोर्ट हैदराबाद, चेन्नई और बेंगलुरु से सीधी उड़ानों से जुड़ा है।
हावड़ा-विजयवाड़ा-चेन्नई मुख्य मार्ग पर स्थित राजमुंदरी स्टेशन से 10 मिनट में ऑटो द्वारा घाट पहुंचा जा सकता है।
विशाखापट्टनम (190 किमी) और विजयवाड़ा (160 किमी) से 4-लेन राष्ट्रीय राजमार्ग 16 उपलब्ध है।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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