सती का दाहिना टखना (घुट्टी) · माँ सावित्री भद्रकाली व स्थाणु भैरव · धर्मक्षेत्र
कुरुक्षेत्रे च सावित्री स्थाणुश्च भैरवः स्मृतः। गुल्फं पपात तत्रैव भद्रकाली नमोऽस्तु ते॥
भावार्थ: कुरुक्षेत्र में सती का गुल्फ (टखना) गिरा, जहाँ सावित्री-भद्रकाली रूप में देवी और स्थाणु रूप में भैरव वास करते हैं।
श्रीकृष्ण और बलराम जी का मुंडन संस्कार भी इसी पावन पीठ पर संपन्न हुआ था। यहाँ स्थाणु महादेव साक्षात भैरव रूप में कुरुक्षेत्र की रक्षा करते हैं।
महाभारत युद्ध से पूर्व भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन ने विजय की कामना से यहाँ माँ भद्रकाली की पूजा की थी और विजयोपरांत अपने श्रेष्ठ रथ के घोड़े माता को अर्पित किए थे। आज भी यहाँ मनोकामना पूर्ण होने पर मिट्टी/चांदी के घोड़े अर्पित करने की अनूठी परंपरा है।
मंदिर के गर्भगृह में माँ भद्रकाली का पावन कूप (शैल कुण्ड) स्थित है जिसके ऊपर चरण पादुकाएं और भव्य रजत प्रतिमा प्रतिष्ठित है।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| मंगला महाआरती | प्रातः 05:30 | चरण पादुका अभिषेक व श्रृंगार |
| संध्या महाआरती | सायं 07:30 | भव्य दीपक आरती व चंडी स्तोत्र पाठ |
कुर्ता-पायजामा, धोती या सादे वस्त्र
साड़ी या सलवार सूट
💡 मंदिर परिसर में शांति व स्वच्छता बनाए रखें।
लाखों भक्तों द्वारा पावन अश्व अर्पण व शतचंडी यज्ञ
ब्रह्मसरोवर महाआरती व शक्तिपीठ दीपदान
चंडीगढ़ या दिल्ली एयरपोर्ट से जीटी रोड (एनएच 44) द्वारा 1.5 से 3 घंटे में पहुँचा जा सकता है।
कुरुक्षेत्र जंक्शन दिल्ली-अमृतसर मुख्य रेलमार्ग पर स्थित है जहाँ सभी प्रमुख ट्रेनें रुकती हैं।
दिल्ली, चंडीगढ़, अंबाला और करनाल से हरियाणा रोडवेज व निजी बसों की 24 घंटे सेवा है।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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