
“रोग, शोक, भय, कालसर्प एवं ग्रह पीड़ा निवारण हेतु देवाधिदेव महादेव का पंचामृत अभिषेक”
शुक्ल यजुर्वेद के रुद्राष्टाध्यायी से अभिमंत्रित होकर जब भगवान शिव का गंगाजल, दूध और गन्ने के रस से अभिषेक किया जाता है, तो साक्षात आशुतोष भगवान तुरंत द्रवित होकर भक्त की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
शिव संहारक नहीं, बल्कि परम कल्याणकारी चेतना हैं। शिवलिंग पर जल चढ़ाना यह सिखाता है कि जीवन में शांत, शीतल और विष को कंठ में धारण कर दूसरों को अमृत देने का स्वभाव रखें।
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घर पर स्वयं करने हेतु सरल एवं प्रमाणिक विधि
उत्तर मुखी होकर बैठें। शिवलिंग को ताम्र पात्र में स्थापित कर हाथ जोड़कर भगवान शिव के पंचाक्षर स्वरूप का ध्यान करें।
ध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारुचंद्रावतंसं रत्नाकल्पोज्ज्वलाङ्गं परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्॥
सरल अर्थ: चांदी के पर्वत समान कांति वाले, मस्तक पर चंद्रमा धारण करने वाले, प्रसन्नमुख भगवान महेश का मैं नित्य ध्यान करता हूँ।
श्रृंगी या तांबे के लोटे से शिवलिंग पर पहले गंगाजल, फिर कच्चा दूध, दही, देशी घी, शहद और गन्ने का रस एक-एक कर अर्पित करें। प्रत्येक द्रव्य के उपरांत गंगाजल से स्नान कराएं।
ॐ नमः शिवाय। ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
सरल अर्थ: तीन नेत्रों वाले, सुगंधित और पुष्टि का पोषण करने वाले शिव की हम वंदना करते हैं। वे हमें मृत्यु के बंधनों से मुक्त कर अमरत्व प्रदान करें।
अनामिका, मध्यमा और तर्जनी उंगली से शिवलिंग पर सफेद चंदन से तीन आड़ी रेखाएं (त्रिपुण्ड) लगाएं। बीच में लाल कुमकुम या रोली की बिंदी लगाएं। इसके पश्चात काशी की भस्म से शिवलिंग का लेपन करें।
त्र्यायुषं जमदग्नेरिति ललाटे। कश्यपस्य त्र्यायुषमिति ग्रीवायाम्। यद्देवेषु त्र्यायुषं तन्नो अस्तु त्र्यायुषम्॥
सरल अर्थ: ऋषि जमदग्नि और कश्यप के समान दीर्घायु और आरोग्य हमें इस पवित्र त्रिपुण्ड से प्राप्त हो।
बेलपत्र का चिकना भाग नीचे (शिवलिंग की ओर) रखकर डंठल को तोड़कर एक-एक कर ॐ नमः शिवाय बोलते हुए अर्पित करें। धतूरा, आक के फूल और शमी पत्र चढ़ाएं।
त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रियायुधम्। त्रिजन्मपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम्॥
सरल अर्थ: तीन दलों वाला, तीन गुणों के प्रतीक, तीन नेत्रों के समान और तीन जन्मों के पापों का संहार करने वाला यह बेलपत्र भगवान शिव को सादर समर्पित है।
भांग-मिश्रित दूध या सफेद मिष्ठान्न का भोग लगाएं। भीमसेनी कर्पूर से आरती करें और डमरू/घंटी बजाते हुए शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करें।
जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम्। डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम्॥
सरल अर्थ: जिनके जटाजूट रूपी वन से बहती गंगा की धारा से कंठ पवित्र है, जो डमरू की डम-डम ध्वनि के साथ प्रचंड तांडव करते हैं, वे भगवान शिव हमारा कल्याण करें।
ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ॥
अर्थ: महामृत्युंजय बीज मंत्र युक्त पाठ से अकाल मृत्यु, असाध्य रोग और ग्रह दोष नष्ट होते हैं।
लाभ: रुद्राभिषेक करते समय इस मंत्र का 108 बार उच्चारण महाफलदायी है।
कुल 6 वस्तुएं
काशी एवं हरिद्वार के प्रामाणिक ब्राह्मणों द्वारा ऑनलाइन अथवा घर पर आकर शास्त्रसम्मत पूजन संपन्न कराया जाएगा।
पंडित सेवा बुक करेंशिव-शक्ति के एकाकार होने की परम पावन तिथि। इस दिन चारों प्रहर का रुद्राभिषेक समस्त पापों का शमन कर मोक्ष प्रदान करता है।
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