“विघ्नहर्ता बाप्पा का गृह आगमन, 21 मोदक व 21 दूर्वा अर्पण एवं विसर्जन विधि”
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को भगवान श्री गणेश का प्राकट्य हुआ था। घर में मिट्टी की पर्यावरण-अनुकूल प्रतिमा स्थापित कर 10 दिनों तक बाप्पा की सेवा करने से घर के समस्त वास्तु दोष, विघ्न, कर्ज और दरिद्रता का नाश होता है। बुद्धि और रिद्धि-सिद्धि का स्थायी वास होता है।
गणेशोत्सव बालकों और युवाओं में उत्साह, सामाजिक समरसता और कला-सृजन का संचार करता है। बाप्पा को घर का सदस्य मानकर उनकी सेवा करना बच्चों में श्रद्धा और सेवाभाव भरता है।
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घर पर स्वयं करने हेतु सरल एवं प्रमाणिक विधि
चौकी पर स्वास्तिक बनाकर अक्षत रखें। ढोल-नगाड़ों और शंख ध्वनि के साथ "गणपति बाप्पा मोरया" बोलते हुए गणेश जी को चौकी पर विराजमान करें। दाहिने हाथ से बाप्पा के हृदय का स्पर्श कर प्राण-प्रतिष्ठा मंत्र का उच्चारण करें।
अस्यै प्राणाः प्रतिष्ठन्तु अस्यै प्राणाः क्षरन्तु च। अस्यै देवत्वमर्चायै मामहेति च कश्चन॥ ॐ गं गणपतये नमः॥
सरल अर्थ: इस पावन विग्रह में भगवान गणेश के प्राण, चेतना और समस्त देव शक्तियां प्रतिष्ठित हों।
मिट्टी की मूर्ति होने के कारण केवल दूर्वा या आम के पत्ते से जल और पंचामृत के छींटे लगाएं (मूर्ति को पानी में न डुबोएं)। इसके पश्चात शुद्ध गंगाजल से स्नान कराएं।
ॐ पञ्चामृतं मयानीतं पयो दधि घृतं मधु। शर्करा च समायुक्तं स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्॥
सरल अर्थ: दूध, दही, घी, शहद और शर्करा युक्त यह पावन पंचामृत स्नान हेतु सादर समर्पित है।
बाप्पा को लाल वस्त्र पहनाएं। बाएं कंधे से दाईं ओर जनेऊ अर्पित करें। अनामिका से बाप्पा के माथे और सूंड पर लाल सिंदूर का तिलक लगाएं।
सिन्दूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम्। शुभदं कामदं चैव सिन्दूरं प्रतिगृह्यताम्॥
सरल अर्थ: सुख, सौभाग्य और मंगल की वृद्धि करने वाला यह शोभनीय लाल सिंदूर बाप्पा स्वीकार करें।
21 दूर्वा की गांठों को "ॐ गणाधीशाय नमः", "ॐ उमापुत्राय नमः", "ॐ विघ्ननाशनाय नमः" आदि नामों के साथ बाप्पा के मस्तक पर अर्पित करें। लाल गुड़हल का पुष्प चढ़ाएं।
त्वं प्रभो सर्वदेवानां त्वं च विघ्नविनाशनः। दूर्वाङ्कुरान् मया दत्तान् गृहाण गणनायक॥
सरल अर्थ: हे समस्त देवों के स्वामी, विघ्नों के नाशक गणनायक! मेरे द्वारा अर्पित यह दूर्वांकुर स्वीकार करें।
कांस्य या चांदी की थाली में 21 मोदक या बेसन के लड्डू सजाकर बाप्पा को भोग लगाएं। साथ में केला, जामुन और पान-सुपारी अर्पित करें।
मोदकैः पूरितं पात्रं स्वादुभिर्गुडसंयुतैः। समर्पयामि देवेश भक्ष्यभोज्यसमन्वितम्॥
सरल अर्थ: गुड़ और मधुर स्वादों से भरे हुए यह मोदक हे देवेश! मैं आपको सादर समर्पित करता हूँ।
सपरिवार मिलकर "जय गणेश जय गणेश देवा, माता जाकी पार्वती पिता महादेवा" की आरती गाएं। अनंत चतुर्दशी या निर्धारित दिन पर बाप्पा का घर के गमले या जलकुंड में विसर्जन करें और उस मिट्टी में तुलसी का पौधा लगाएं।
यान्तु देवगणाः सर्वे पूजामादाय मामकीम्। इष्टकामप्रसिद्ध्यर्थं पुनरागमनाय च॥
सरल अर्थ: हे गणेश जी! मेरी पूजा को स्वीकार कर अपने धाम को पधारें और अगले वर्ष पुनः हमारे घर आगमन की कृपा करें।
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा॥
अर्थ: समस्त सिद्धियों के दाता गणेश जी का यह तांत्रिक व वैदिक महामंत्र सभी विघ्नों को दूर कर आकर्षण और ऐश्वर्य प्रदान करता है।
लाभ: विद्या, बुद्धि और व्यापार में तीव्र प्रगति।
प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम्। भक्तावासं स्मरेन्नित्यमायुःकामार्थसिद्धये॥
अर्थ: माता गौरी के पुत्र विनायक को सिर झुकाकर प्रणाम कर नित्य स्मरण करने से आयु, कामना और धन की सिद्धि होती है।
लाभ: जीवन के असाध्य संकटों का त्वरित निवारण।
कुल 6 वस्तुएं
काशी एवं हरिद्वार के प्रामाणिक ब्राह्मणों द्वारा ऑनलाइन अथवा घर पर आकर शास्त्रसम्मत पूजन संपन्न कराया जाएगा।
पंडित सेवा बुक करेंघर-घर में गणपति बप्पा की मिट्टी की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा, 21 मोदक व दूर्वा अर्पण और मंगल आरती का आनंदमय पर्व।
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