“विघ्नहर्ता रिद्धि-सिद्धि के दाता भगवान गणेश का पावन अवतरण दिवस”
घर-घर में गणपति बप्पा की मिट्टी की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा, 21 मोदक व दूर्वा अर्पण और मंगल आरती का आनंदमय पर्व।
माता पार्वती ने अपने उबटन से बालक गणेश का निर्माण कर उसमें प्राण फूंके थे। भगवान शिव ने उन्हें अग्रपूज्य और विघ्नहर्ता का सर्वोच्च वरदान दिया।
मुद्गल पुराण के अनुसार भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन मध्याह्न काल में श्री गणेश का प्राकट्य हुआ था। इस दिन चंद्र दर्शन वर्जित माना गया है।
चौकी पर लाल या पीला रेशमी वस्त्र बिछाकर गणेश जी का आवाहन
प्राण-प्रतिष्ठा मंत्रों से मूर्ति में दिव्य ऊर्जा का संचार
21 गांठ हरी दूर्वा और लाल सिंदूर का तिलक
21 मोदक अथवा मोतीचूर लड्डुओं का नैवेद्य
श्री गणेश अथर्वशीर्ष का सस्वर पाठ व संकटनाशन स्तोत्र
मध्याह्न काल में गणेश जी की मूर्ति की स्थापना व षोडशोपचार पूजन सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
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