नवरात्रि प्रतिपदा को शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना करने से घर में माँ जगदम्बा की असीम कृपा बरसती है। जानें मिट्टी की वेदी पर जौ बोने का महत्व, अखंड दीप जलाने की विधि और नौ दिनों के आवश्यक नियम।
शारदीय नवरात्रि: शक्ति उपासना का पावन रहस्य
देवी भागवत पुराण के अनुसार नवरात्रि के नौ दिन ब्रह्माण्डीय शक्ति (कॉस्मिक एनर्जी) के जाग्रत होने का समय होते हैं। इन नौ दिनों में सात्विक रहकर, भूमि शयन और नियमपूर्वक दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से साधक के अंतर्मन के समस्त विकार भस्म हो जाते हैं।
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#घटस्थापना की शास्त्रीय पद्धति:
1. **मिट्टी की वेदी**: शुद्ध बालू मिट्टी में गंगाजल छिड़ककर उसमें देशी जौ बोएं।
2. **कलश प्रतिष्ठा**: वेदी के बीच में तांबे या मिट्टी का कलश स्थापित करें जिसमें सुपारी, दूर्वा, सिक्का और आम के पल्लव लगे हों।
3. **नारियल स्थापना**: कलश के ऊपर लाल वस्त्र में लपेटा हुआ पानीदार नारियल (जिसका मुख साधक की ओर हो) रखें।
4. **अखंड दीप**: माँ के सम्मुख गाय के घी का अखंड दीपक प्रज्वलित करें।
5. **सप्तशती पाठ**: प्रतिदिन 13 अध्यायों का क्रमबद्ध पाठ करें अथवा नवार्ण मंत्र का 108 बार जप करें।
सीधे पूजा आरम्भ करेंनवरात्रि घटस्थापना एवं माँ दुर्गा षोडशोपचार पूजन विधि
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