करवा चौथ: सतीत्व और दांपत्य अनुराग का अनुपम पर्व
महाभारत काल में जब पांडव संकट में थे, तब भगवान श्री कृष्ण के निर्देश पर द्रौपदी ने करवा चौथ का व्रत किया था जिसके प्रभाव से पांडवों के समस्त संकट दूर हो गए थे।---
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अखण्ड सौभाग्य, दांपत्य प्रेम और पति की दीर्घायु का पावन निर्जला महाव्रत

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सरगी सूर्योदय से कम से कम दो घंटे पूर्व (ब्रह्ममुहूर्त में प्रातः 04:00 से 04:45 के मध्य) ग्रहण करनी चाहिए। इसमें फल, मेवे और सात्विक मिष्ठान्न होना चाहिए।
चंद्रमा मन का कारक और शीतलता का प्रतीक है। छलनी से छनकर आने वाली चंद्रमा की किरणें आंखों के माध्यम से मन को एकाग्र करती हैं, और फिर पति का दर्शन करने से दांपत्य संबंध में सौहार्द और समर्पण गहरा होता है।