
“अखण्ड सौभाग्य, पति की दीर्घायु और सुखद दांपत्य जीवन हेतु पावन निर्जला व्रत”
कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को सुहागिन स्त्रियां अपने पति की दीर्घायु और अटूट प्रेम के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। चौथ माता (माँ पार्वती) का पूजन करने से वैवाहिक जीवन में आने वाले सभी कष्ट और विघ्न दूर होते हैं। छलनी से चंद्रमा और पति का दर्शन समर्पण और शीतलता का प्रतीक है।
यह पर्व भारतीय संस्कृति में दांपत्य निष्ठा, प्रेम और परिवार के प्रति समर्पण का सबसे सुंदर उत्सव है। नई पीढ़ी के लिए यह रिश्ते में एक-दूसरे के प्रति सम्मान और साथ निभाने का संकल्प है।
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घर पर स्वयं करने हेतु सरल एवं प्रमाणिक विधि
सूर्योदय से पूर्व (प्रातः 4 से 5 बजे के बीच) सास द्वारा दी गई सरगी (मेवे, फल, मिष्ठान्न) ग्रहण करें। इसके बाद हाथ में जल लेकर दिनभर निर्जला रहकर व्रत रखने का संकल्प लें।
मम सुखसौभाग्य पुत्रपौत्रादिसुस्थिर श्रीप्राप्तये करकचतुर्थीव्रतमहं करिष्ये॥
सरल अर्थ: अपने सुख, अखण्ड सौभाग्य, पुत्र-पौत्र की समृद्धि और स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए मैं यह करवा चौथ व्रत करती हूँ।
सायंकाल उत्तर-पूर्व कोने में चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं। दीवार पर गेरू से करवा माता का चित्र बनाएं या तस्वीर स्थापित करें। दोनों करवों पर स्वास्तिक बनाकर कलावा बांधें।
ॐ शिवायै नमः। ॐ उमायै नमः। ॐ पार्वत्यै नमः॥
सरल अर्थ: समस्त सौभाग्य प्रदान करने वाली जगदम्बा माँ पार्वती को मेरा बारम्बार प्रणाम।
परिवार व पड़ोस की सुहागिन महिलाओं के साथ मिलकर करवा चौथ माता और वीरावती की कथा सुनें। कथा के दौरान 7 बार एक-दूसरे के साथ करवे की अदला-बदली (करवा फेरना) करें।
करकं क्षीरसम्पूर्णा तोयपूर्णमथापि वा। ददामि रत्नसंयुक्तं चिरंजीवतु मे पतिः॥
सरल अर्थ: दूध, जल और रत्नों से युक्त यह करवा मैं अर्पित करती हूँ, मेरे पति दीर्घायु और यशस्वी हों।
जैसे ही आकाश में चंद्रमा का उदय हो, लोटे में जल, थोड़ा कच्चा दूध, अक्षत और रोली मिलाएं। पूजा की छलनी पर घी का दीपक रखें।
ॐ क्षीरपुत्राय विद्महे अमृतत्त्वाय धीमहि तन्नश्चन्द्रः प्रचोदयात्॥
सरल अर्थ: क्षीरसागर से उत्पन्न, अमृत के स्वरूप भगवान चन्द्रमा का हम ध्यान करते हैं, वे हमारे जीवन को शीतलता प्रदान करें।
छलनी की ओट से पहले पूर्ण चंद्र के दर्शन करें और लोटे से 3 बार अर्घ्य समर्पित करें। इसके पश्चात उसी छलनी से दीपक की लौ में अपने पति का चेहरा देखें और उनकी दीर्घायु की प्रार्थना करें।
गगनार्णवमाणिक्य चन्द्र दाक्षायणीपते। गृहाणार्घ्यं मया दत्तं गणेशप्रतिरूपक॥
सरल अर्थ: आकाश रूपी समुद्र के श्रेष्ठ रत्न, दक्ष-पुत्री रोहिणी के प्रिय स्वामी चन्द्रमा! गणेश जी के प्रतिरूप यह अर्घ्य स्वीकार करें।
पति अपनी पत्नी को अपने हाथ से जल पिलाकर और मिष्ठान्न खिलाकर व्रत का पारण कराते हैं। इसके बाद पत्नी पति और घर के बड़े-बुजुर्गों के चरण छूकर आशीर्वाद लेती है और सास को बायना भेंट करती है।
नमः शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संततिं शुभाम्। प्रयच्छ भक्तियुक्तायै नारीणां हरवल्लभे॥
सरल अर्थ: हे शिवप्रिया माँ पार्वती! आप मुझे अखण्ड सौभाग्य और उत्तम संतान का वरदान प्रदान करें।
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॐ सौं ॐ नमः शिवायै॥
अर्थ: माँ उमा और भगवान शिव का युगल मंत्र जो वैवाहिक जीवन में कलह को मिटाकर प्रेम और सौभाग्य की वृद्धि करता है।
लाभ: दांपत्य जीवन में मधुरता और पति की सुरक्षा।
ॐ सोमाय नमः। ॐ चन्द्रमसे नमः॥
अर्थ: शीतल कांति वाले भगवान चंद्र देव को मेरा प्रणाम।
लाभ: मानसिक शांति और दांपत्य सौहार्द की प्राप्ति।
कुल 6 वस्तुएं
काशी एवं हरिद्वार के प्रामाणिक ब्राह्मणों द्वारा ऑनलाइन अथवा घर पर आकर शास्त्रसम्मत पूजन संपन्न कराया जाएगा।
पंडित सेवा बुक करेंसूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला व्रत, मिट्टी के करवे से चौथ माता का पूजन, करवा चौथ कथा श्रवण और छलनी से पति व चंद्र दर्शन के बाद अर्घ्य देने की विधि।
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