“वातावरण शुद्धि, नकारात्मक ऊर्जा विनाश एवं ग्रह शांति हेतु घरेलू सरल यज्ञ पद्धति”
ऋग्वेद का प्रथम मंत्र ही अग्नि देव की स्तुति से आरम्भ होता है—"अग्निमीळे पुरोहितं यज्ञस्य देवमृत्विजम्"। हवन केवल धार्मिक कर्म नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक पर्यावरण शुद्धि क्रिया है। गाय के घी, गुग्गल, लोबान और जड़ी-बूटियों की आहुति जब अग्नि में पड़ती है, तो वायुमण्डल के रोगाणु और नकारात्मक तरंगें नष्ट होती हैं तथा घर में देवताओं का वास होता है।
घर में महीने में कम से कम एक बार हवन करने से बच्चों में सनातन संस्कृति के संस्कार गहरे होते हैं और घर के वास्तु दोष, नजर दोष एवं नकारात्मकता का स्थायी निवारण होता है।
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घर पर स्वयं करने हेतु सरल एवं प्रमाणिक विधि
तांबे के हवन कुण्ड के नीचे रेत या ईंट की परत रखें। कुण्ड में आम की सूखी लकड़ियों को पिरामिड के आकार में त्रिकोण रीति से सजाएं। बीच में भीमसेनी कर्पूर रखें।
ॐ भूः ॐ भुवः ॐ स्वः। ॐ अग्नये नमः। आवाहयामि स्थापयामि ध्यायामि॥
सरल अर्थ: तीनों लोकों के आधार अग्नि देव! हम आपका आवाहन, स्थापना और ध्यान करते हैं।
माचिस से सीधे लकड़ी न जलाएं; पहले कर्पूर जलाकर उसे अग्नि रूप में समिधा के बीच स्थापित करें। पंखे से हवा देकर अग्नि को प्रदीप्त करें।
ॐ भूर्भुवः स्वद्यौरिव भूम्ना पृथिवीव वरिम्णा। तस्यास्ते पृथिवि देवयजनि पृष्ठेऽग्निमन्नादमन्नाद्यायादधे॥
सरल अर्थ: हे पृथ्वी देवी! देवयज्ञ के निमित्त हम तुम्हारी पावन पीठ पर अन्नदाता अग्नि को स्थापित करते हैं।
हवन कुण्ड के चारों ओर आचमनी से जल की धारा दें। इसके बाद स्रुवा (हवन चम्मच) से गाय के घी की 4 आहुतियां "ॐ प्रजापतये स्वाहा", "ॐ इन्द्राय स्वाहा", "ॐ अग्नये स्वाहा", "ॐ सोमाय स्वाहा" से दें।
ॐ प्रजापतये स्वाहा इदं प्रजापतये न मम। ॐ इन्द्राय स्वाहा इदमिन्द्राय न मम॥
सरल अर्थ: यह आहुति प्रजापति और इन्द्र देव के निमित्त है, यह मेरा नहीं प्रभु का है (अहंकार विसर्जन)।
हवन सामग्री में थोड़ा घी मिलाकर मध्यमा, अनामिका और अंगूठे से (मृगी मुद्रा में) आहुतियां दें। गणेश जी, नवग्रहों और अपने कुलदेवता के नाम से 1-1 आहुति दें।
ॐ गं गणपतये स्वाहा। ॐ सूर्याय स्वाहा। ॐ चन्द्राय स्वाहा। ॐ कुलदेवताभ्यो स्वाहा॥
सरल अर्थ: गणेश जी, सूर्य, चंद्र और समस्त कुलदेवताओं को यह पावन हवि समर्पित है।
परिवार के सभी सदस्य मिलकर हवन सामग्री से 24 बार गायत्री मंत्र और 11 बार महामृत्युंजय मंत्र से सस्वर आहुति दें।
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् स्वाहा॥ ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् स्वाहा॥
सरल अर्थ: परब्रह्म सविता और महामृत्युंजय शिव के निमित्त यह हवि समर्पित है, वे हमारे समस्त भय व रोगों को भस्म करें।
सूखे नारियल के गोले के मुख को थोड़ा काटकर उसमें घी, लौंग, सुपारी और बताशा भरें। सपरिवार खड़े होकर दोनों हाथों से गोले को अग्नि के मध्य समर्पित करें। अंत में हवन की शीतल भस्म का तिलक माथे पर लगाएं।
ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते। पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते स्वाहा॥
सरल अर्थ: वह परब्रह्म पूर्ण है, यह जगत भी पूर्ण है। पूर्ण में से पूर्ण निकालने पर भी पूर्ण ही शेष रहता है।
ॐ अग्ने नय सुपथा राये अस्मान् विश्वानि देव वयुनानि विद्वान्। युयोध्यस्मज्जुहुराणमेनो भूयिष्ठां ते नमउक्तिं विधेम॥
अर्थ: हे प्रकाशमान अग्निदेव! हमें सन्मार्ग से ऐश्वर्य की ओर ले चलें। आप हमारे समस्त कर्मों को जानते हैं, हमारे पापों को नष्ट करें, हम आपको बारम्बार नमन करते हैं।
लाभ: ज्ञान, विवेक और पारिवारिक समृद्धि का वरदान।
ॐ सर्वं वै पूर्णं स्वाहा॥
अर्थ: हे यज्ञपुरुष! यह समस्त समर्पण पूर्ण हुआ, इसे स्वीकार कर हमें पूर्णता प्रदान करें।
लाभ: यज्ञ का शत-प्रतिशत फल प्राप्त होना।
कुल 6 वस्तुएं
काशी एवं हरिद्वार के प्रामाणिक ब्राह्मणों द्वारा ऑनलाइन अथवा घर पर आकर शास्त्रसम्मत पूजन संपन्न कराया जाएगा।
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