
“सृष्टि के प्रथम वास्तुकार व दिव्य शिल्पी भगवान विश्वकर्मा का आराधना दिवस”
कारखानों, दुकानों, वाहनों, कम्प्यूटर, औजारों और इंजीनियरिंग उपकरणों की शुद्धि, पूजन और कार्यकुशलता की वृद्धि हेतु विशेष अनुष्ठान।
भगवान विश्वकर्मा ने ही स्वर्ग लोक, द्वारका नगरी, हस्तिनापुर, भगवान शिव का त्रिशूल और भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र निर्मित किया था। वे समस्त शिल्पकलाओं के अधिष्ठाता हैं।
ऋग्वेद के अनुसार विश्वकर्मा समस्त सृष्टि के सृजनकर्ता हैं। इस दिन यंत्रों और औजारों की पूजा करने से औद्योगिक दुर्घटनाएं टलती हैं और व्यवसाय में अभूतपूर्व उन्नति होती है।
समस्त औजारों, मशीनों और उपकरणों की साफ-सफाई और तैल संवर्धन
उपकरणों पर रोली, चंदन और अक्षत से स्वास्तिक बनाना
भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा की स्थापना और माला अर्पण
पंचामृत, फल, बताशे व लड्डू का नैवेद्य अर्पण
यंत्रों को एक दिन का विश्राम देकर आरती करना
कन्या संक्रान्ति के पुण्यकाल में प्रातः अथवा मध्याह्न में यंत्र पूजन करना चाहिए।
आज का पंचांग देखेंकाशी एवं हरिद्वार के प्रामाणिक वैदिक ब्राह्मणों द्वारा ऑनलाइन वीडियो कॉल अथवा संकल्प पूजा का शास्त्रीय प्रबंध।
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