
“आद्यशक्ति माँ दुर्गा के नौ दिव्य स्वरूपों की नवदिवसीय महाउपासना”
माँ दुर्गा के शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक के नौ पावन रूपों की उपासना, दुर्गा सप्तशती पाठ और कन्या पूजन का महापर्व।
माँ दुर्गा ने महिषासुर का वध कर देवताओं और तीनों लोकों को भयमुक्त किया था। भगवान राम ने भी रावण वध से पूर्व नवरात्रि व्रत रखकर माँ चण्डी का अनुष्ठान किया था।
देवी भागवत पुराण के अनुसार नवरात्रि में अखंड ज्योति प्रज्वलित कर दुर्गा चालीसा व अर्गला-कीलक-कवच का पाठ करने से साधक के समस्त विघ्न व रोग नष्ट हो जाते हैं।
मिट्टी की वेदी पर जौ बोना और कलश स्थापना
अखण्ड ज्योति की स्थापना और रक्षा सूत्र संकल्प
दैनिक श्री दुर्गा सप्तशती का अध्यायवार पाठ
अष्टमी/नवमी को हवन एवं नौ कन्याओं का पाद प्रक्षालन व पूजन
प्रतिपदा तिथि को प्रातःकाल अभिजीत मुहूर्त में घटस्थापना (कलश स्थापना) अति शुभ फलप्रद है।
आज का पंचांग देखेंकाशी एवं हरिद्वार के प्रामाणिक वैदिक ब्राह्मणों द्वारा ऑनलाइन वीडियो कॉल अथवा संकल्प पूजा का शास्त्रीय प्रबंध।
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