
“सूर्य का मकर राशि में प्रवेश, देवताओं के दिन का आरम्भ एवं दान-पुण्य का महापर्व”
पवित्र नदियों में स्नान, सूर्य को तांबे के पात्र से अर्घ्य, तिल-गुड़ का सेवन व दान और पतंग उत्सव का आनंद।
इस दिन से सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं। भीष्म पितामह ने अपने प्राण त्यागने हेतु सूर्य के उत्तरायण होने की ही प्रतीक्षा की थी।
पुराणों के अनुसार इस दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि देव के घर (मकर राशि) में एक माह के लिए प्रवास करते हैं, जो पिता-पुत्र के सौहार्द का प्रतीक है।
प्रातः तिल मिश्रित जल से गंगा या किसी भी पवित्र नदी/तीर्थ में स्नान
तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन, अक्षत और गुड़ डालकर सूर्य देव को अर्घ्य
काले और सफेद तिल के लड्डू, गुड़, खिचड़ी का दान
गाय को हरा चारा और गुड़ खिलाना
आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ
संक्रान्ति काल से 8 घंटे पूर्व एवं पश्चात का समय महापुण्यकाल कहलाता है।
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