“अधर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य और अहंकार पर मर्यादा की शाश्वत विजय का विजयोत्सव”
सनातन संस्कृति का परम विजय पर्व, जब भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का संहार कर धर्म की पुनर्स्थापना की थी और माँ दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था। इस दिन शस्त्र, वाहन एवं शमी वृक्ष का पूजन किया जाता है।
विजयादशमी बुराई, काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार के दस सिरों (दशानन) पर विजय प्राप्त करने का आत्मिक संदेश देती है। इस दिन प्रारंभ किया गया कोई भी शुभ कार्य, विद्यारंभ अथवा नया उद्यम अक्षुण्ण सफलता प्रदान करता है।
वाल्मीकि रामायण के अनुसार भगवान राम ने नौ दिन तक माँ भगवती की आराधना (नवरात्र) करने के उपरांत दशमी के दिन रावण का वध किया था। इसी दिन पांडवों ने अज्ञातवास पूर्ण होने पर शमी वृक्ष में छिपाए अपने गांडीव व दिव्यास्त्र पुनः धारण किए थे।
प्रातःकाल माँ अपराजिता एवं मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का षोडशोपचार पूजन
शस्त्रों, उपकरणों, औजारों और वाहनों की शुद्धि कर कुमकुम-अक्षत से पूजन
शमी वृक्ष का पूजन कर "शमी शमयते पापम्..." मंत्र से पत्तियां तोड़कर स्वर्ण मुद्रा के रूप में बांटना
संध्या समय रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन एवं बुराई के त्याग का संकल्प
नीलकंठ पक्षी का दर्शन कर एक-दूसरे को विजयादशमी की शुभकामनाएं देना
विजय काल दोपहर में लगभग 2:00 से 2:45 बजे के मध्य रहता है, जिसमें शस्त्र पूजन व नए कार्यों का शुभारंभ अत्यंत मंगलकारी माना जाता है।
आज का पंचांग देखेंकाशी एवं हरिद्वार के प्रामाणिक वैदिक ब्राह्मणों द्वारा ऑनलाइन वीडियो कॉल अथवा संकल्प पूजा का शास्त्रीय प्रबंध।
पंडित सेवा बुक करेंगंगाजल, शुद्ध पीतल दीया, कुमकुम, धूप, मौली, हवन सामग्री एवं आवश्यक सभी 21+ सामग्रियां एक ही सुंदर बॉक्स में।
पूजा किट ऑर्डर करें