
“अंधकार पर प्रकाश और अज्ञान पर ज्ञान की अमर विजय का महापर्व”
सनातन धर्म का सर्वाधिक भव्य प्रकाशपर्व, जिसमें माँ महालक्ष्मी और बुद्धिदाता श्री गणेश का विधिवत पूजन कर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के 14 वर्ष के वनवास के पश्चात अयोध्या आगमन पर समस्त नगरवासियों ने घी के दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। इसी दिन समुद्र मंथन से माँ लक्ष्मी प्रकट हुई थीं।
स्कन्द पुराण एवं पद्म पुराण के अनुसार कार्तिक अमावस्या की पावन निशा में माँ लक्ष्मी भूलोक पर विचरण करती हैं और जिस घर में पवित्रता, प्रकाश, सात्विकता और भक्तिभाव होता है, वहाँ स्थायी वास करती हैं।
घर एवं देवालय की पूर्ण शुद्धि एवं गंगाजल से पवित्रीकरण
चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर अक्षत के अष्टदल कमल का निर्माण
कलश स्थापना एवं वरुण देव का आवाहन
श्री गणेश एवं माँ लक्ष्मी का षोडशोपचार पूजन
कमलगट्टे, कौड़ी, गोमती चक्र एवं धनिया अर्पण
कपूर आरती एवं सम्पूर्ण घर में दीप प्रज्वलन
प्रदोष काल एवं स्थिर लग्न (वृषभ लग्न) में माँ लक्ष्मी का पूजन सर्वोत्तम फलदायी माना गया है।
आज का पंचांग देखेंकाशी एवं हरिद्वार के प्रामाणिक वैदिक ब्राह्मणों द्वारा ऑनलाइन वीडियो कॉल अथवा संकल्प पूजा का शास्त्रीय प्रबंध।
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