
“आरोग्य के देवता भगवान धन्वन्तरि और धनाध्यक्ष कुबेर देव का आराधना पर्व”
अमृत कलश लेकर अवतरित हुए आयुर्वेद प्रवर्तक भगवान धन्वन्तरि का पूजन, पीतल/सोना/चांदी के पात्रों की खरीद और यम दीपदान।
समुद्र मंथन के समय इसी दिन भगवान धन्वन्तरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। अतः यह दिन स्वास्थ्य, दीर्घायु और समृद्धि की प्राप्ति का महान अवसर है।
राजा हिम के पुत्र की अल्पायु की भविष्यवाणी को उनकी पत्नी ने धनतेरस की रात्रि यमराज के निमित्त दीपदान और आभूषणों का ढेर लगाकर टाल दिया था।
शुभ मुहूर्त में पीतल के बर्तन, चांदी के सिक्के अथवा धनिया के बीज खरीदना
संध्याकाल में घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा में यमराज के निमित्त चौमुखा दीपक जलाना
भगवान धन्वन्तरि को तुलसी मिश्रित खीर अथवा औषधि का भोग लगाना
कुबेर यंत्र और तिजोरी का कुमकुम अक्षत से पूजन
प्रदोष काल में सायंकाल बर्तन व स्वर्ण-रजत खरीदना और यम दीप प्रज्वलित करना श्रेष्ठ है।
आज का पंचांग देखेंकाशी एवं हरिद्वार के प्रामाणिक वैदिक ब्राह्मणों द्वारा ऑनलाइन वीडियो कॉल अथवा संकल्प पूजा का शास्त्रीय प्रबंध।
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