भगवान विश्वकर्मा ने ही स्वर्ण लंका, द्वारकापुरी, इंद्रपुरी और भगवान शिव का त्रिशूल बनाया था। आज के आधुनिक युग में केवल कारीगर ही नहीं, बल्कि सॉफ्टवेयर इंजीनियर अपने लैपटॉप और ट्रांसपोर्टर अपने वाहनों की पूजा कर कर्म के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हैं।
भगवान विश्वकर्मा: सनातन शिल्पकला और इंजीनियरिंग के जनक
ऋग्वेद के 10वें मण्डल में भगवान विश्वकर्मा को ब्रह्माण्ड का प्रथम शिल्पी और सर्वद्रष्टा कहा गया है। हमारे सनातन धर्म की विशेषता यह है कि हम केवल निराकार परमात्मा की ही नहीं, बल्कि उस हर उपकरण, यंत्र और औजार की पूजा करते हैं जो हमारे जीवन को चलाने और अन्न उपजाने में सहायक है।
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#विश्वकर्मा पूजा के 4 स्वर्णिम चरण:
1. **औजारों व मशीनों की शुद्धि**: एक दिन पूर्व समस्त मशीनों की ग्रीसिंग और साफ-सफाई करें।
2. **स्वास्तिक एवं रक्षा सूत्र**: प्रत्येक मुख्य मशीन और औजार पर रोली से स्वास्तिक बनाएं और कलावा बांधें।
3. **लघु हवन एवं भोग**: 21 बार "ॐ श्री विश्वकर्मणे नमः स्वाहा" से आहुतियां दें और मोतीचूर के लड्डू का भोग लगाएं।
4. **श्रमिकों व कारीगरों का सम्मान**: अपने सभी कर्मचारियों को उपहार, मिठाई और दक्षिणा देकर उनका आदर करें।
सीधे पूजा आरम्भ करेंविश्वकर्मा पूजा विधि (यंत्र, औजार, दुकान एवं कारखाने का सम्पूर्ण पूजन)
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